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सितंबर से बदल जाएगा Gold-Silver ETF में निवेश का तरीका! सोना-चांदी निवेशकों पर पड़ेगा सीधा असर, जानें नया नियम

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Aug 28, 2026 01:50 pm IST,  Updated : Aug 28, 2026 01:50 pm IST

SEBI ने ETF की ट्रेडिंग सिस्टम में बदलाव किया है। नए नियम 1 सितंबर 2026 से लागू होंगे। इसका मकसद ETF की कीमत को उसके वास्तविक एसेट वैल्यू के ज्यादा करीब रखना है।

गोल्ड-सिल्वर ETF में...- India TV Hindi
गोल्ड-सिल्वर ETF में निवेश का तरीका बदलेगा Image Source : ANI

अगर आप Gold ETF या Silver ETF में निवेश करते हैं तो सितंबर की शुरुआत आपके लिए अहम होने वाली है। बाजार नियामक SEBI ने ETF की ट्रेडिंग व्यवस्था में बदलाव किया है। नए नियम 1 सितंबर 2026 से लागू होंगे। इसका मकसद ETF की कीमत को उसके असली एसेट वैल्यू के ज्यादा करीब रखना और निवेशकों के लिए ट्रेडिंग को बेहतर बनाना है।

मौजूदा सिस्टम में शेयर बाजार पर ETF के प्राइस बैंड तय करने के लिए दो कारोबारी दिन पुराने यानी T-2 नेट एसेट वैल्यू (NAV) का इस्तेमाल किया जाता है। इससे कई बार ETF की बाजार कीमत और उसके अंदर मौजूद एसेट की वैल्यू में अंतर आ जाता है। नए नियम में SEBI ने ज्यादा ताजा रेफरेंस प्राइस का प्रावधान किया है। इसमें ETF की कैटेगरी के अनुसार पिछले दिन का क्लोजिंग NAV या अन्य रियल-टाइम वैल्यूएशन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे कीमत और वास्तविक वैल्यू के बीच अंतर कम होने की उम्मीद है।

अब डायनेमिक होंगे प्राइस बैंड

अभी ज्यादातर ETF के लिए अधिकतम 20 फीसदी तक का फिक्स्ड प्राइस बैंड लागू होता है। नए सिस्टम में यह व्यवस्था बदल जाएगी। ETF जिस एसेट को ट्रैक करता है, उसकी प्रकृति और उतार-चढ़ाव के आधार पर प्राइस बैंड डायनेमिक होंगे। इससे बाजार में अचानक होने वाले बदलावों के दौरान ETF की कीमत को ज्यादा प्रभावी तरीके से एडजस्ट होने में मदद मिल सकती है।

गोल्ड-सिल्वर ETF के लिए खास बदलाव

SEBI ने कमोडिटी ETF के लिए प्री-ओपन कॉल ऑक्शन की व्यवस्था भी शुरू करने का फैसला किया है। इसका असर खासतौर पर गोल्ड और सिल्वर ETF पर पड़ सकता है। चूंकि सोने-चांदी की वैश्विक कीमतों में रातभर बदलाव हो सकता है, इसलिए बाजार खुलने से पहले बेहतर तरीके से कीमत तय करने में यह व्यवस्था मदद कर सकती है।

निवेशकों को क्या फायदा होगा?

नए नियमों से ETF की कीमत उसके एक्चुअल एसेट वैल्यू के करीब रहने की उम्मीद है। इससे NAV के मुकाबले बहुत ज्यादा प्रीमियम या डिस्काउंट पर ट्रेडिंग की स्थिति कम हो सकती है। साथ ही लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी बेहतर होने की संभावना है।

Disclaimer: ये कोई निवेश सलाह नहीं है बल्कि सिर्फ एक जानकारी है। रुपये-पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।

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